मनासा । जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के सख्त दिशा-निर्देशों के बाद मनासा नगर में संचालित निजी चिकित्सालयों और नर्सिंग होम्स में हड़कंप मच गया है। नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे अस्पतालों पर नकेल कसने के लिए प्रशासनिक अमले ने नगर के कई चिकित्सालयों और नर्सिंग होम्स का औचक निरीक्षण किया।
यह कार्रवाई इतनी विस्तृत थी कि इसमें राजस्व, नगर परिषद, फायर और बिजली विभाग के आला अधिकारी एक साथ जमीन पर उतरे।
इन प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित रही जांच
कलेक्टर के आदेश पर गठित संयुक्त टीम ने अस्पतालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की:
फायर सेफ्टी: आगजनी जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एनओसी (NOC) और फायर फाइटिंग सिस्टम चालू हालत में हैं या नहीं।
बिजली सुरक्षा: अस्पतालों का लोड और वायरिंग व्यवस्था (विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुरूप)।
साफ-सफाई और बायोमेडिकल वेस्ट: कचरा प्रबंधन और स्वच्छता की स्थिति।
पंजीयन व दस्तावेज: अस्पताल संचालन के वैधानिक नियम और डॉक्टरों की उपलब्धता।
कार्रवाई में शामिल रहा पूरा प्रशासनिक अमला
मनासा में हुई इस बड़ी संयुक्त कार्रवाई का नेतृत्व खुद क्षेत्र के आला अधिकारियों ने किया। जांच टीम में मुख्य रूप से शामिल रहे:
किरण आंजना (एस डी एम, मनासा)
मुकेश निगम (तहसीलदार)
संजय पाटीदार (सी एम ओ, नगर परिषद)
मालवीय जी (जे. ई., बिजली विभाग)
लोकेंद्र साधु (स्वच्छता अधिकारी)
फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट के विशेष कर्मचारी
इसके साथ ही नगर परिषद, विद्युत मंडल और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम भी पूरे समय मौके पर तैनात रही। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में जिन भी चिकित्सालयों या नर्सिंग होम में कमियां पाई गई हैं, उनके खिलाफ पंचनामा बनाकर वरिष्ठ कार्यालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी और जल्द ही सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। ओर कुछ चिकित्सालय को नोटिस जारी कर कमियां तय समय मे पूरी करवाई जाएगी । साथ ही लीलावती क्लिनिक पर यश मेडिकल को फार्मासिस्ट उपलब्ध न होने के कारण बंद करवा दिया गया। साथ ही नाकोड़ा हॉस्पिटल पर भी कार्यवाही की गई ।